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दिल तो बच्चा है …
उम्र जरूर बढ़ रही है
दिल तो बच्चा है जी,
परहेज रोज करती हूं,
हफ्ते में एक दिन जीती हूँ,
जो पसंद हो खाती हूँ,
मर्जी की ड्रेस पहनती हूँ,
प्यार किया तो डरना क्या,
तर्ज पर डांस करती हूं,
मधुबन में राधिका नाची रे,
कमरे में बचपन नाचा रे !
जब तक साँसे इजाजत दे रही,
जीवन को मस्ती से जीती हूँ,
जज और वकील स्वयं ही हूँ,
दखल अंदाज़ी नहीं करने देती !
रिश्तों की नमी नहीं ढूंढती,
रिश्ते कलम की स्याही बने,
पन्नो पर सबको सजाती हूँ,
भूली किसी को भी नहीं,
उम्र जरूर बढ़ रही है,
मन की उम्र घट रही !
आवाज़ धीमी हो रही,
पर कलम शोर कर रही,
पांव की गति कमजोर हो रही,
मन के पांव की गति तेज हुई,
शिक्षा देने में जीवन बीता,
समय बहुत कुछ सीखा रहा,
उम्र जरूर बढ़ रही है,
दिल तो बच्चा है जी !!
स्वरचित
भगवती सक्सेना गौड़